"नमस्कार! रोज़ क्लिनिक में मरीज़ मुझसे जो सवाल पूछते हैं, सोचा वही आपसे साझा करूँ – वैसे ही, जैसे कुर्सी पर बैठकर बात करते हैं। चाय जैसी गरम और सीधी।"
दिल की बातें कॉलम
आपका दिल सिर्फ़ आपका नहीं है। वो आपकी पत्नी का है, बच्चों का है, उन पोते-पोतियों का है जिनके साथ अभी बहुत खेलना बाक़ी है। हम लोग - ख़ासकर मर्द - अपनी सेहत को हमेशा सबसे आख़िर में रखते हैं। पर अपने दिल का ख़याल रखना स्वार्थ नहीं है साहब - वो अपने परिवार से प्यार है। इस महीने एक बार BP ज़रूर चेक कराएँगे। बस इतना सा।